(बृजेश चतुर्वेदी) कन्नौज: इस बार हैट्रिक के लिए सपा को करनी होगी कड़ी मेहनत (फोटो सहित )

Posted at : 2019-04-02 08:48:08

अखिलेश सतर्क, आये और की सिपहसालारों से खास मन्त्रणा /कन्नौज। कन्नौज संसदीय सीट से तीसरी बार हैट्रिक लगाने को बेताब सपा इस बार फूंक फूंक कर कदम रख रही है। 1999 से सपा का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर सपा का कब्जा रहा है लेकिन विकास के तमाम काम कराये जाने के बावजूद 2014 में डिंपल यादव यह सीट बमुश्किल बचा पाई। 75 हज़ार की भारी जीत से जहा 1999 में मुलायम सिंह जहा डॉ राम मनोहर लोहिया के इस गढ़ को पुनर्जीवित किया था और उनके उत्तराधिकारी अखिलेश ने जहा इस सीट पर अपनी विजय पताका थाम कर सूबे की राजनीति में एक मुकाम पैदा किया उसी सीट पर मोदी लहर के सहारे भाजपा के सुब्रत पाठक ने कड़ी टक्कर दी। और लाखों के अंतर की जीत को महज 19हजार 907 वोट पर समेट दिया। तीन जिलों औरैया, कानपुर देहात और कन्नौज में फैली इस संसदीय सीट में शामिल 5 विधान सभा क्षेत्रों में से दो में डिम्पल को हार का सामना करना पड़ा था और ऐसा तब हुआ जब सूबे में सपा की सरकार थी। आरोप लगाने वाले तो अब तक कहते है कि डिम्पल जीती नही जितायी गयी।वैसे यह न तो सच है और न ही हो सकता था। ये और बात है कि तत्कालीन जिलाधीश और वर्तमान में वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजेश कुमार को जब मथुरा को जिलाधिकारी बना कर भेजा गया तो लीगो ने उसे भी इसी बात से जोड़ा और उस पोस्टिंग को इनाम बताया। वास्तविकता ये है कि उस चुनाव में सपा की इज़्ज़त गुरसहायगंज क्षेत्र ने ही बचाई थी वो भी मतगणना के अंतिम चरण में। सपा इस बार बसपा के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरी है लेकिन कन्नौज में बसपा का वोट ट्रांसफर उसके लिए चुनौती होने के साथ साथ घाटे का सौदा भी हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते है कि बसपा ईमानदारी से अपना वोट सपा से शेयर कर ले तो डिम्पल रिकार्ड कायम कर सकती है। सपा मुखिया के मन मे भी यही भाव रहे होंगे शायद यही वजह थी कि अधिसूचना जारी होने के चंद घंटे बाद अखिलेश खामोशी से सपा दफ्तर पहुंचे और सपा बसपा के खास सिपहसालारों के साथ उन्होंने बनद कमरे में लम्बी मन्त्रणा की