लखनऊ। मायावती और अखिलेश की संयुक्त प्रेस कांफ्रेस कल , करेंगे लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन का ऐलान

Posted at : 2019-01-11 07:35:25

26 साल बाद दोनों पार्टियों के शीर्ष एक साथ मंच पर साथ होंगे लखनऊ। लोकसभा चुनाव के लिए प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन अब तय हो गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 12 जनवरी को इसकी औपचारिक घोषणा करेंगे। इसके लिए दोनों नेता लखनऊ के ताज होटल में शनिवार दोपहर 12 बजे संयुक्त प्रेस कांफ्रें स करेंगे। इसके लिए सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेद्र चौधरी व बसपा महासचिव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। सपा-बसपा के बीच नजदीकियां तो पिछले करीब एक साल से देखी जा रहीं हैं, पहले माना जा रहा था कि गठबंधन का एलान बसपा प्रमुख मायावती के जन्मदिन 15 जनवरी को होगा। लेकिन इसकी घोषणा अब शनिवार को ही हो जाएगी। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें है। सपा-बसपा के साथ आने से अब केन्द्र और प्रदेश की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी के लिए 2014 लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को दोहराना अधिक चुनौतीपूर्ण होगा। 2014 में एनडी, गठबंधन ने 73 सीटें जीती थी। प्रेस कांफ्रें स में सीटों के बंटवारे की भी घोषणा हो सकती है। अभी कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों पार्टियां 37-37 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। रायबरेली और अमेठी के सीट कांग्रेस के लिए छोड़ी जा सकती है। जबकि रालोद को तीन सीटें दी जा सकती हैं। मायावती बृहस्पतिवार को लखनऊ पहुंची थीं, अगले ही दिन उन्होंने गठबंधन को अंतिम रूप देते हुए संयुक्त प्रेस कांफ्रेस की तैयारी कर ली। यूपी में सपा और बसपा 26 साल बाद एक बार फिर एक साथ गठबंधन करके चुनावी मैदान में उतरने जा रही हैं। इसके पहले दोनों दलों ने 1993 का विधानसभा चुनाव गठबंधन करके लड़ा था। तब सपा के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और बसपा के अध्यक्ष कांशीराम थे। देश में अयोध्या आन्दोलन के चरमकाल में उस समय मुलायम और कांशीराम की जोड़ी ने उत्तर प्रदेश में भाजपा हराकर सत्ता पर कब्जा जमा लिया था। दोनों दलों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद के चलते हलाकि यह गठबंधन ज्यादा नहीं चल पाया लेकिन दोनों ने एकजुट होकर राजनीतिक रूप से पूरे देश को अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया था। उत्तर प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा से परास्त हो चुकीं सपा-बसपा एक बार एक साथ आने से राजनीतिक समीकरणों का बदलना तय माना जा रहा है। पिछले चुनावों में दोनों दलों के वोट प्रतिशत को अगर एक साथ कर दिया जाय तो वह भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बनता हुआ दिखता है। दोनों दलों ने पिछले साल प्रदेश में हुए तीन लोकसभा उपचुनाव में एक बार फिर अपनी ताकत दिखा दी है, जब अपौचारिक गठबंधन न होते हए भी सपा ने बसपा के सहयोग से भाजपा को उसकी सबसे मजबूत मानी जाने वाली परम्परागत गोरखपुर सीट के साथ ही फूलपुर पर भी हरा दिया। गोरखपुर से भाजपा से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार पांच बार से सांसद रहे। प्रदेश में सरकार के बावजूद भाजपा की गोरखपुर में उसके लिए बड़ा झटका रहा।