लखनऊ।नगर निगम: अतिक्रमण के साये में खो गया निशान-ए-मीर

Posted at : 2019-01-11 05:54:59

मोहम्मद शानू सिटी स्टेशन चौराहे पर निगम की पार्क में जमादारों का कब्जा पार्क की निशानी को मिटाने की हो रही साजिश: क्षेत्रवासी लखनऊ। अब तो चलते हैं बुतकदे से ऐ मीर, फिर मिलेंगे गर खुदा लाया। मीर तकी मीर का कहा यह शेर शक्ल लेता सा लगा जब उनके नाम का पत्थर सिटी स्टेशन के पास वाले तिकोना पार्क में अतिक्रमण के साये में खोता हुआ नजर आया। देखने वालों को मायूसी हो रही है कि इतने बड़े शायर का निशां शहर से यूं गायब होता नजर आ रहा है। चूंकि सोशल मीडिया का दौर है तो यह ट्रेंड भी हुआ कि अवध के अदब को ऊंचाइयों तक ले जाने वाले शायर को ऐसे कैसे भुलाया जा सकता है, उनके नाम को संभाल कर क्यों नहीं रखा जा रहा। मीर भले ही उसी बुतकदे में हों मगर लोगों की आखों से इस लिए ओझल हो गये है, दरअसल उनके लगे पत्थर के चारों ओर अतिक्रमण और अवैध कब्जे तक है। इतना ही नहीं अखिलेश सरकार में इसी पार्क में बनाये गये प्याउ पर भी जमादारों का कब्जा है,जैसा कि क्षेत्र के लोग बताते हैं। यहां की तस्वीरे भी इस बात की गवाही देती हैं कि जो पार्क मीर तकी मीर के पत्थर के लिए बनी है। यहां अब जमादारों व कुछ दुकानदारों का कब्जा बरकरार है। इससे मीर तकी मीर का पत्थर लोगों की नजरों से ओझल हो गया है। इलाके के लोगों का आरोप है कि नगर निगम और सरकार जानबुझकर इस मामले को नजर अंदाज कर निशान-ए-मीर की निशानी को मिटाने की कोशिश की जा रही है। बताते चले कि अदब के शहर लखनऊ को स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत नम्बर एक रैकिंग में लाने की कोशिश की जा रही है तो दूसरी ओर आखिर इस पार्क को कियों नजर अंदाज किया जा रहा है। इस मामले को लेकर क्षेत्रीय लोगों में काफी आक्रोश है। इलाके के ही एक नवाब बताते हैं कि पार्क में पहले मीर की याद में एक किताब और कलम बनाई गई थी। लेकिन काफी अरसा हुआ, वह किताब-कलम देखरेख की कमी के चलते हट गई। इसके अलावा पार्क की बदहाली इतनी ज्यादा हो गयी है कि अब तो मीर का पत्थर तक नजर नहीं आता। जानकार बताते है कि नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण में इसी लिए पिछड़ता है कि शहर के कई जगहों पर नगर निगम सहीं ढंग से काम नहीं करता। इसी के चलते रैकिंग में सुधार नहीं होता। ऐसा सिटी स्टेशन चौराहे पर बनी पार्क में भी नजर आता है।